पिछले ६ महीनों से में जब à¤à¥€ टà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥‹à¤‚ में सफर करता हूठकि टà¥à¤°à¥‡à¤¨ में जो वसà¥à¤¤à¥à¤à¤ बिकती है वो निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ मूलà¥à¤¯ से अधिक कि होती है जैसे चाय मसाला ३रॠकी और dip चाय ४रॠमें मिलनी चाहिठजो कि ५रॠमें हर जगह बिकती है यही हाल कमोबेश सà¤à¥€ चीजों का है और सà¤à¥€ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨à¥‹à¤‚ और टà¥à¤°à¥‡à¤¨ का है.अगर किसी से पूछो कि अधिक दामों में चीजें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ बेच रहे हो तो कहते है कि महंगाई का जमाना है और हमें à¤à¥€ घर चलाना है.लेकिन यातà¥à¤°à¤¿à¤“ं को रोजाना लाखों का नà¥à¤•सान उठाना पडता है इसका धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखते हà¥à¤ इसकी जाà¤à¤š करके विषयवसà¥à¤¤à¥ को ठीक करने की कृपा करें
धनà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¦ /
अमित कà¥à¤®à¤¾à¤° तिवारी
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An email communication has been sent to Indian Railways on December 10, 2011, 1:07 pm